How Our Sanskrit Literature was Destroyed & Distorted by foreign powers

Official website : http://rajivdixitmp3.com/

संस्कृत भाषा में जितना समृद्ध जितना लिखा गया है शायद ही दुनिया में और किसी भाषा में लिखा गया होगा आपलोग कहेंगे की दिकह्यी तो नहीं देता है ये दिखाई नहीं देता है ये हमारी लापरवाही का नतीजा है हमसे कई सारी भूले हुयी है उनमे से एक बड़ी भूल ये हुयी है की हम अपने साहित्य को बचा के नहीं रख सके पिछले हज़ार बर्षो में हमारे साहित्य का बहुत नुकसान हुआ है|

पिछले हजार वर्षों में आपको जानकर शायद ये हैरानी होगी की विदेशी लुटेरो ने जबसे भारत में आना शुरू किया तो यहाँ की संपत्ति को ही नहीं लुटा यहाँ की साहित्य को भी लुटा क्युकी ज्ञान उसमे भरा पड़ा था तो हमसे सहोत्य की साज संभाल नहीं हो पाई पिछले हजार सालो में कई विदेशी अकरंता तो ऐसे ए जिन्होंने हमारे साहित्य को जला दिया भारत के सबसे बड़ी पुस्तकालय तक्षिला जिसको जला दिया गया था और ६ महीने तक विदशी अकर्न्ताओ ने उन पुस्तकों को जला जला के अपना पानी गरम किया था इतना बड़ा था तक्षिला हमारा ज्ञान का भंडार जो ६ महीने तक जलता रहा था कल्पना करिये कितने पुस्तके रही होंगी जो ६ महीने तक जलती रही होंगी कई विदशी आक्रांता और लुटेरे ऐसे आये की उन्होंने हमारा साहित्य नष्ट किया कई ऐसे आये जिन्होंने हमारा साहित्य लुट लिया और कई ऐसे आये जिन्होंने हमारे साहित्य में तोड़ मरोड़ करके उसको ऐसा प्रस्तुत कर दिया की वो हमको सबसे ज्यादा खराब दीखता है !!

Facebook video page : https://www.facebook.com/RajivDixitOr…

Wikipidea : http://en.wikipedia.org/wiki/Rajiv_Dixit

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